कल
बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नहीं जाता, जो बीत गया है वह गुजर क्यों नहीं जाता। कभी बेरंग होकर भी रंग बिखर जातें हैं, तो कभी रंगीन दुनिया भी बेरंग हो जाती हैं। कुछ सुन लिए अल्फ़ाज़ मेरे, कुछ सुना दिए मैंने, वक्त का इंतजार करते, या इंतजार में वक्त गुजारते? यह ज़िन्दगी है जनाब, मेरी कहा सुनती हैं, बार बार गिराती हैं और इक नई कहानी लिखवाती हैं।